गढ़वा के जोड़ा मंदिर में श्रीहनुमान चालीसा पाठ का शुभारंभ, 56 सप्ताह से जारी है श्रीजानकी बाग की पहल Garhwa

सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण हम सभी का सामूहिक दायित्व : नीरज श्रीधर 'स्वर्गीय'
गढ़वा के जोड़ा मंदिर में श्रीहनुमान चालीसा पाठ का शुभारंभ, 56 सप्ताह से जारी है श्रीजानकी बाग की पहल

माँ गढ़देवी की पावन नगरी गढ़वा स्थित जोड़ा मंदिर में मंगलवार की संध्या कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा के अवसर पर श्रीहनुमान चालीसा के साप्ताहिक पाठ का शुभारंभ हुआ। संध्या 6:30 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से हनुमान जी की आराधना की। अब प्रत्येक मंगलवार को संध्या 6:00 से 7:00 बजे तक श्रीहनुमान चालीसा पाठ, आरती एवं आध्यात्मिक-सांस्कृतिक चर्चा आयोजित की जाएगी।

श्रीजानकी बाग से शुरू हुई पहल का विभिन्न राज्यों में विस्तार

ध्यातव्य है कि आज से 56 सप्ताह पूर्व गढ़वा स्थित श्रीजानकी बाग में साप्ताहिक श्रीहनुमान चालीसा पाठ एवं आध्यात्मिक-सांस्कृतिक चर्चा का शुभारंभ हुआ था, जो अनवरत जारी है। इसी पहल से प्रेरित होकर उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के कुछ स्थानों के साथ राँची के डोरंडा क्षेत्र में भी ऐसे आयोजन नियमित रूप से संचालित हो रहे हैं। यह प्रयास सनातन परंपराओं, आध्यात्मिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का माध्यम बन रहा है। इस आयोजन में सुश्रुत सेवा संस्थान, गढ़वा के निदेशक सह सदर अस्पताल गढ़वा के चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर टी पीयूष, श्रीमन्नारायण शुक्ल, अधिवक्ता अमोद कुमार सिन्हा और सुदामा बिंद का पूर्ण सहयोग निरंतर प्राप्त हो रहा है।

राजेश नारायण पाण्डेय ने कहा कि श्रीहनुमान चालीसा का नियमित पाठ सेवा, समर्पण और सदाचार की प्रेरणा देता है। ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

खुशबू केशरी ने कहा कि धार्मिक आयोजन सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने के साथ आत्मिक शांति, सामाजिक सद्भाव और परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करते हैं।

पं. हर्ष द्विवेदी कला मंच की कला साधिका खुशबू उपाध्याय ने कहा कि भगवान हनुमान का जीवन साहस, विनम्रता, निष्ठा और निःस्वार्थ सेवा का अनुपम उदाहरण है। श्रीहनुमान चालीसा का पाठ आध्यात्मिक चेतना जागृत करने और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देता है।

एंजल केशरी ने कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। भारतीय परंपराओं में निहित नैतिक मूल्यों, सद्भाव और परस्पर सम्मान को आत्मसात करना आज भी आवश्यक है।


कला एवं साहित्य की अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती के प्रांतीय कला धरोहर संयोजक नीरज श्रीधर 'स्वर्गीय' ने कहा, “भारत की सनातन संस्कृति हमारी अमूल्य धरोहर है। कला, साहित्य, धर्म और आध्यात्मिक परंपराएँ हमारी सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाती हैं। श्रीहनुमान चालीसा का नियमित पाठ सेवा, समर्पण, साहस और कर्तव्यनिष्ठा जैसे जीवन-मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है।

गढ़वा के जोड़ा मंदिर में आयोजित ऐसे कार्यक्रम सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ नई पीढ़ी को अपने संस्कारों और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ते हैं। भारतीय कला एवं सांस्कृतिक धरोहर के प्रति जागरूकता बढ़ाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।”

भक्तिमय वातावरण में आयोजित कार्यक्रम का समापन प्रसाद वितरण एवं शांति पाठ के साथ हुआ।

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