श्रद्धांजलि सभा में नम आंखों से दी स्व. प्रह्लाद तिवारी को अंतिम श्रद्धांजलि Garhwa

श्रद्धांजलि सभा में नम आंखों से दी स्व. प्रह्लाद तिवारी को अंतिम श्रद्धांजलि
भंडरिया, प्रतिनिधि। स्वर्गीय प्रह्लाद तिवारी की श्रद्धांजलि सभा शुक्रवार को तिवारी निवास, भंडरिया में आयोजित हुई। सभा में बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उनके व्यक्तित्व, सामाजिक योगदान और सेवाभाव को याद करते हुए कई लोग भावुक हो उठे। श्रद्धांजलि सभा का माहौल पूरी तरह गमगीन रहा।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि प्रह्लाद तिवारी का पूरा जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण की मिसाल रहा। उन्होंने भारतीय सेना में रहकर देश की सेवा की और सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाते रहे। सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने आम लोगों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास किया।
वक्ताओं ने कहा कि भंडरिया प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में भी प्रह्लाद तिवारी ने संगठन को मजबूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कभी पद को प्रतिष्ठा का माध्यम नहीं माना, बल्कि जनसरोकार को प्राथमिकता दी। क्षेत्र के लोगों के सुख-दुःख में शामिल होना और जरूरतमंदों की मदद करना उनके व्यक्तित्व की विशेष पहचान रही।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसके पद और प्रतिष्ठा से नहीं होती, बल्कि समाज के बीच उसके कार्यों और व्यवहार से बनती है। प्रह्लाद तिवारी ने अपने सरल व्यवहार, सेवाभाव और सामाजिक सरोकारों के माध्यम से लोगों के बीच जो विश्वास कायम किया, वही उनकी सबसे बड़ी विरासत है। उनके निधन से सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में जो रिक्तता उत्पन्न हुई है, उसकी भरपाई आसान नहीं होगी।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। उपस्थित लोगों ने ईश्वर से स्वर्गीय प्रह्लाद तिवारी की आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
सभा में परिजनों के अलावा जनप्रतिनिधि, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने उनके साथ बिताए समय और उनके सामाजिक योगदान को याद किया।
देश के लिए सेवा, समाज के लिए समर्पण और लोगों के दिलों में बनाई पहचान—स्व. प्रह्लाद तिवारी की यही विरासत अब क्षेत्रवासियों के बीच उनकी अमिट स्मृति बन गई है।
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