गढ़वा में जनजातीय शिल्पकार पंजीकरण मेला (TAeM) का सफल आयोजन Garhwa

गढ़वा में जनजातीय शिल्पकार पंजीकरण मेला (TAeM) का सफल आयोजन
226 जनजातीय शिल्पकारों ने लिया भाग, पारंपरिक जनजातीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की पहल
गढ़वा, 24 अगस्त 2026:
जनजातीय शिल्पकारों एवं कारीगरों को पहचान, बाजार एवं बेहतर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ट्राइफेड (TRIFED), जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जनजातीय शिल्पकार पंजीकरण मेला (Tribal Artisan Empanelment Mela–TAeM) का आयोजन आज टाउन हॉल, गढ़वा में किया गया। मेले में गढ़वा एवं आसपास के जिलों से कुल 226 जनजातीय शिल्पकारों एवं कारीगरों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन गढ़वा के उपायुक्त श्री पशुपतिनाथ मिश्र, IAS द्वारा किया गया। इस अवसर पर श्री राज कुमार, IOFS, क्षेत्रीय प्रबंधक, TRIFED, झारखंड एवं बिहार, जिला कल्याण पदाधिकारी श्री देवानंद राम, DPM श्री बिमलेश शुक्ला, श्री प्रशांत कुमार मिश्र, निदेशक, JSS, TRIFED क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा JSS के अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।
उद्घाटन अवसर पर उपायुक्त श्री पशुपतिनाथ मिश्र, IAS ने जनजातीय शिल्पकारों द्वारा तैयार किए जा रहे पारंपरिक हस्तशिल्प एवं अन्य उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि जनजातीय कला एवं शिल्प हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से स्थानीय शिल्पकारों को उचित पहचान, बाजार एवं आय के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
विभिन्न पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन

मेले में गढ़वा एवं आसपास के क्षेत्रों से आए जनजातीय शिल्पकारों ने अपनी पारंपरिक कला, कौशल एवं रचनात्मकता से तैयार किए गए विभिन्न प्रकार के उत्पादों का प्रदर्शन किया। प्रदर्शित उत्पादों में विशेष रूप से बांस से बने हस्तशिल्प एवं उपयोगी सामग्री, बांस के डलिया एवं टोकरियां, घास एवं प्राकृतिक रेशों से बने उत्पाद, पत्तों से निर्मित चटाइयां, लकड़ी से बने रसोईघर के सामान एवं अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएं प्रमुख रहीं।
इसके अतिरिक्त शिल्पकारों द्वारा लाख (Lac) से निर्मित आभूषण एवं सजावटी सामग्री, पारंपरिक आभूषण, होम डेकोरेशन की वस्तुएं, सिल्क एवं कॉटन से बने वस्त्र एवं हस्तकरघा उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए।

मेले में Van Dhan एवं Natural/Organic Food Products का भी विशेष प्रदर्शन किया गया, जिसमें स्थानीय जनजातीय समुदायों द्वारा तैयार एवं संग्रहित प्राकृतिक खाद्य उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। इन उत्पादों के माध्यम से स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों एवं जनजातीय पारंपरिक ज्ञान को बाजार से जोड़ने की संभावनाओं को भी सामने रखा गया।

इन उत्पादों में जनजातीय समुदायों की पारंपरिक कला, संस्कृति, स्थानीय संसाधनों एवं पीढ़ियों से चले आ रहे कौशल की स्पष्ट झलक देखने को मिली।

श्री राज कुमार, IOFS, क्षेत्रीय प्रबंधक, TRIFED, झारखंड एवं बिहार ने बताया कि TRIFED का उद्देश्य जनजातीय समुदाय के पारंपरिक ज्ञान, कला एवं कौशल को बाजार से जोड़ते हुए उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। TAeM के माध्यम से जनजातीय शिल्पकारों का TRIFED के साथ पंजीकरण/Empanelment, उनके उत्पादों का मूल्यांकन एवं चयन तथा उन्हें व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

मेले में TRIFED एवं JSS की टीम द्वारा शिल्पकारों के उत्पादों की जानकारी प्राप्त की गई तथा उनके दस्तावेजों, उत्पादों एवं शिल्प कौशल के संबंध में आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई। शिल्पकारों को TRIFED से जुड़ने, अपने उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने, उत्पादों की गुणवत्ता एवं पैकेजिंग में सुधार तथा डिजिटल माध्यमों के उपयोग के संबंध में भी जानकारी प्रदान की गई।

चयनित एवं पात्र शिल्पकारों को आगे TRIFED की विपणन एवं आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, जिससे उनके उत्पादों को स्थानीय स्तर से आगे राष्ट्रीय एवं व्यापक बाजार तक पहुंचाया जा सके।

कुल 226 जनजातीय शिल्पकारों की सहभागिता इस बात को दर्शाती है कि गढ़वा एवं आसपास के क्षेत्रों के जनजातीय समुदायों में अपनी पारंपरिक कला, हस्तशिल्प एवं प्राकृतिक उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने के प्रति काफी उत्साह है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में TRIFED क्षेत्रीय कार्यालय, झारखंड एवं बिहार तथा JSS के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। TAeM का उद्देश्य केवल शिल्पकारों का पंजीकरण करना ही नहीं, बल्कि उनकी पारंपरिक कला एवं उत्पादों को “स्थानीय से राष्ट्रीय बाजार” तक पहुंचाकर जनजातीय समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।

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