शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले विद्यालय की हालत अगर ऐसी हो तो बच्चों का भविष्य कैसे बनेगा? Kandi

गढ़वा : शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले विद्यालय की हालत अगर ऐसी हो तो बच्चों का भविष्य कैसे बनेगा? जी हां इस विद्यालय का हाल देखकर यही सवाल उठता है। 
बाहर से देखने पर यह एक विद्यालय लगता है, लेकिन अंदर की स्थिति बेहद जर्जर और दयनीय है। बारिश के मौसम में छत से पानी टपक रहा है। तीन कमरे और कार्यालय में लगातार पानी गिरने से पढ़ाई ठप है और जरूरी दस्तावेज भी भीग रहे हैं। यह खबर है जिले के कांडी प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय चटनीया की, जहां कुल 332 छात्र-छात्राएं*म पढ़ते हैं, जिनमें छात्राओं की संख्या आधे से अधिक है। लेकिन छात्राओं के लिए एक भी शौचालय नहीं है। परिसर में एक पुराना शौचालय है, जो पूरी तरह अनुपयोगी है। मजबूरी में छात्राएं खुले में शौच के लिए जाने को विवश हैं। यहां लगभग सभी कक्षाओं में बेंच-डेस्क टूटे पड़े हैं। बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। साथ ही 3 पांच कमरे में खिड़की-दरवाजे टूटकर बिखर गए हैं। मध्याह्न भोजन बनाने के लिए किचन शेड नहीं है। कमरे में ही खाना बनता है। विद्यालय की चारदीवारी तक नहीं है।
उक्त विद्यालय की सभी समस्याओं को छात्र छात्राओं ने मीडिया के सामने व्यथा बयां किया। विद्यालय के प्रधानाध्यापक कुलदीप राम ने बताया कि छत टपकने के कारण कार्यालय का काम और कक्षाओं में बैठे बच्चों की पढ़ाई दोनों प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि शौच के लिए छात्र तो जैसे-तैसे बाहर चले जाते हैं, लेकिन छात्राओं की समस्या सबसे गंभीर है। चुकी एक अच्छा शौचालय नहीं है। उन्होंने शिक्षा विभाग और वरीय पदाधिकारियों से विद्यालय भवन की मरम्मत, छात्राओं के लिए शौचालय, बेंच-डेस्क, किचन शेड और बाउंड्री वॉल बनवाने की मांग की है।
 हालांकि शिक्षक समय पर आकर पढ़ाई कराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जर्जर भवन और संसाधनों के अभाव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना करना मुश्किल है। अब देखना है कि विभाग कब इस शिक्षा मंदिर की सुध लेता है?

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