पीड़ित परिवार को मिले मुआवजा, प्रशासनिक सुरक्षा एवं त्वरित न्याय : डॉ कुलदेव
गढ़वा : पलामू जिला के चैनपुर प्रखंड के रामपुर (चौधरी टोला) में बीते दिन जमीन विवाद में हुई हिंसक प्रहार में 30 वर्षीय सकेन्द्र चौधरी नामक युवा की हत्या हो गई थी और अन्य चार लोग घायल थे जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा था और अभी घर पर लौट चुके हैं। उसमें एक लड़का यशवंत कुमार के शरीर में अभी भी गोली फंसा हुआ है।
163 धारा के तहत निषेधाज्ञा लागू होने के कारण रविवार को अकेले पीड़ित परिवार से मिलने पहुँचे महर्षि वेद व्यास परिषद, झारखंड के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष डॉ कुलदेव चौधरी ने कहा कि यह हत्या बेहद दुःखद और मर्माहत करने वाली घटना है। पीड़ित परिवार और सभी घायल व्यक्तियों के प्रति मैं अपनी संवेदना व्यक्त करता हूँ। पलामू की धरती शांतिप्रिय है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि जमीन के एक टुकड़े के लिए किसी की जान चली जाए यह पूरे समाज के लिए शर्म की बात है। इस दुःख की घड़ी में हम सभी मृतक के परिवार के साथ खड़े हैं। अभी तक पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। लाइसेंसी बन्दूक को निरस्त करने की अनुशंसा की गई है। हम मांग करते हैं कि इसी तरह जाँच निष्पक्ष हो और असली साज़िशकर्ता व आरोपी को सख्त से सख्त सजा मिले ताकि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो। इस घटना को दबाने के लिए कुछ निर्दोष लोगों पर झूठे मुकदमे किये जा रहे हैं, इसे भी प्रशासन गम्भीरतापूर्वक जाँच करे, हमें प्रशासन और कानून पर पूरा भरोसा है। विवादित स्थल पर जाने के बाद जानकारी मिली कि वैसे तो यह जमीन विवाद कई वर्षों से चलते आ रहा है। न जाने इस विवाद में कितने लोगों की जान चली गई। अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो दोनों पक्षों के साथ फिर किसी अनहोनी की आशंका है। हम बदला नहीं, बदलाव चाहते हैं। जमीन का विवाद लाठी, गोली और बन्दूक से नहीं, लोक अदालत से सुलझे। प्रशासन कारवाई करे, हम शांति बनाए रखेंगे। हम भीड़तंत्र के खिलाफ हैं। लेकिन मैं कहना चाहता हूँ कि यह हत्या सिर्फ दो परिवार की लड़ाई नहीं है। जमीन विवाद में हत्याएं इसलिए होती है क्योंकि वर्षों से केस लटके रहते हैं। राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं होने के कारण हर साल दर्जनों परिवार बर्बाद होते हैं। सरकार झारभूमि पोर्टल पर सारे रिकॉर्ड चढ़ाए और गांव में कैम्प लगाकर दुरुस्त करे, नहीं तो कानून से भरोसा उठ जाएगा और लोग कानून को हाथ में ले लेंगे। देखते देखते आज एक परिवार उजड़ गया। सकेन्द्र चौधरी पत्नी सहित तीन छोटे छोटे बच्चों को छोड़ गए। हमारे लिए सबसे चिंतनीय विषय है कि मृतक के बच्चों की पढ़ाई और पत्नी की सुरक्षा सुनिश्चित हो। हम सरकार से मुख्यमंत्री राज्य पीड़ित मुआवजा योजना के तहत 20 लाख या फिर विधिसम्मत मुआवजा मिले, जिसमें 50% तुरंत अंतरिम राहत मिले। परिवार में कमाने वाला चला गया तो विधवा महिला को अनुकंपा के आधार पर चतुर्थवर्गीय नौकरी या स्वरोजगार के लिए 5 लाख सहायता मिले और किसी तरह की अनहोनी न हो उस क्षेत्र में सुरक्षा बहाल हो। यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष, जाति विशेष या समुदाय विशेष नहीं। यह जो विवादित जमीन है उसे अंचल अधिकारी या संबंधित अधिकारी कागजात के अनुसार जल्द से जल्द इसका निराकरण करें। हमें इंसाफ चाहिए, तनाव नहीं। जमीन विवाद खून से नहीं कानून से सुलझे। समाज के हर वर्गों को आपसी भाईचारा से रहने की जरूरत है। जिंदगी बार बार नहीं मिलती है। अगर मनमुटाव रहेगा तो दोनों पक्षों के साथ कभी भी फिर अनहोनी हो सकती है इससे बचने के लिए कोई ठोस कदम उठाने की जरूरत है। डॉ कुलदेव चौधरी ने अपनी ओर से 5000 रुपए राशि सहयोग की और सभी घायलों को निःशुल्क दवा देने की पेशकश की।
*प्रमुख माँगे -*
* विवादित जमीन का असली हकदार कौन है इसकी गहन जाँच कर सम्बंधित अधिकारी दोनों पक्षों को शांत कराएं।
* लाईसेंसी बन्दूक सुरक्षा के लिए निर्गत किया जाता है ना कि किसी की हत्या के लिए। अगर निष्पक्ष जाँच में आरोपी सच साबित होता है तो निश्चित रूप से उन पर सख्त से सख्त कारवाई होनी चाहिए।
* अब तो सकेंद्र चौधरी इस दुनिया में नहीं है। लेकिन उनकी विधवा पत्नी, तीन छोटे छोटे बच्चे है। बच्चों की पढ़ाई, प्रशासनिक सुरक्षा और परिवार का जीवकोपार्जन के लिए अनुकम्पा के आधार पर चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी के पद पर नौकरी मिले या स्वरोजगार हेतु 5 लाख रुपये अनुदान में मिले।
* पीड़ित परिवार को मुआवजा के रूप में 20 लाख या विधि सम्मत मुआवजा मुहैया कराया जाए ताकि परिवार का भरण पोषण हो सके।
* दोनों पक्षों के सामाजिक संगठन व प्रशासन के सहयोग से दोषी व्यक्तियों पर कारवाई हो और निर्दोष व्यक्तियों को जेल जाने से रोका जाए।
मौके पर मृतक की पत्नी तेतरी कुँवर, पुत्र नितेश चौधरी, पिता मधु चौधरी, उदय नारायण चौधरी, सरयू चौधरी, रामदेव चौधरी, हिरामन चौधरी, मनोज चौधरी आदि उपस्थित थे।
