तप्ती धूप और भीषण गर्मी में बूंद बूंद पानी को तड़प रहे ग्रामीण, गंदी कुएं का पानी पीने को है विवश
गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड के ग्राम बेलोपाती में इन दिनों भीषण पेयजल संकट देखने को मिल रहा है। जहां इंसान को जिंदा रहने के लिए हवा और पानी की अत्यंत आवश्यकता होती है वैसे में बूंद बूंद पानी के लिए तड़प रहे हैं ग्रामीण बताते चलें की
एक तरफ भीषण गर्मी का प्रकोप तो दूसरी तरफ गांव में चापाकल और जलमीनार की व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीणों को पीने का साफ पानी नहीं होने से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब हो की स्थिति ऐसी भयावह है कि गांव के करीब 8 से 10 घरों के लोग एकमात्र कुएं के गंदे पानी पर निर्भर हैं।
जानकारी देते हुए ग्रामीणों ने बताया कि गांव के जयगोविंद मिश्रा के कुएं से ही लोग पानी भरकर पीने और घरेलू कामों में इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन इस चिलचिलाती गर्मी में कुएं का पानी भी लगातार कम होता जा रहा है। कई बार कुएं में मेंढक, कीड़े-मकोड़े और गंदगी गिर जाती है, फिर भी मजबूरी में ग्रामीण उसी पानी को पीने में उपयोग कर रहे हैं।
एक तो ग्रामीणों को पानी की गंभीर समस्या सताए हुए हैं तो वहीं दूसरी तरफ इस गंदे पानी को पीने से कहीं कोई गंभीर बीमारी का शिकार न हो जाए इस से ग्रामीण हतप्रभ हैं
ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी में पानी के बिना जीवन काफी कठिन हो गया है। इस पानी की गंभीर समस्याओं ने महिलाओं और बच्चों को दूर-दूर तक पानी के लिए भटकने पर मजबूर कर दिया है। पानी की इस गंभीर समस्या से मजबूर लाचार और परेशान गांव के लोगों ने सरकार और प्रशासन से जल्द से जल्द चापाकल और जलमीनार की व्यवस्था सुदृढ़ कराने की गुहार लगाई है।
मौके पर ग्रामीण श्रवण राम, राजू कुमार, आशीष कुमार, अशोक राम, बेचन राम, राहुल कुमार और धर्मेंद्र कुमार सहित भारी संख्या में लोगों का कहना है कि अगर जल्द से जल्द इस भीषण और गंभीर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में समस्या और भी गंभीर और भयावह हो सकती है जिससे लोगों का बूंद बूंद पानी को तड़प कर जान चला जाएगा
आश्चर्य का बात तो यह है की इस गंभीर समस्या पर न अबतक किसी जनप्रतिनिधि का ध्यान गया नहीं किसी अधिकारी का सभी अपनी अपनी कृषि गरम करने में लगे हुए हैं हम ग्रामीण जनता जिए या मरे मानो जनता से उन्हें कोई मतलब नहीं है जब चुनाव नजदीक आता है तो लोग बड़े बड़े वादे करते हैं और जब चुनाव समाप्त हो जाए तो कोई हाल तक पूछने नहीं आता हम ग्रामीणों को सुनने वाला यहां कोई नहीं है आखिर हम ग्रामीण अपनी समस्याओं को किसे सुनाएं
अब देखना यह है कि आखिर प्रशासन ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या पर यूं ही हाथ पर हाथ धरे बैठता है या ध्यान देता है और बेलोपाती गांव के लोगों को आखिर कब्तक शुद्ध पेयजल की सुविधा मिल पाती है।
