गढ़वा से विकास कुमार की रिपोर्ट
गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगोर के विचार हम भारतीयों के लिए सदैव अनुकरणीय व धरोहर के रूप में रहेगा। राष्ट्रगान के जनक थे गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर।
स्थानीय जीएन कान्वेंट(10+2)स्कूल में भारतीय साहित्य,संगीत और कला के महान पुरोधा गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर की जयंती धूमधाम से मनाई गई जिसमें छात्र-छात्राओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के निदेशक मदन प्रसाद केशरी द्वारा दीप प्रज्वलित कर रविंद्र नाथ टैगोर के चित्र पर अर्पित कर किया गया।
सभागार में उपस्थित बच्चों को संबोधित करते हुए निदेशक ने कहा कि रविंद्र नाथ टैगोर एक प्रतिष्ठित बंगाली परिवार से थे जिनके घर का वातावरण कला, साहित्य और संस्कृति से भरपूर था।उनके पिता देवेन्द्र नाथ टैगोर व माता शारदा देवी ने बड़े अनुशासन में उनकी परिवरिश की थी जिसके कारण उनमें जन्म से ही अद्भुत मेधा के धनी रहे। रविंद्र नाथ टैगोर केवल एक कवि ही नहीं बल्कि एक दार्शनिक, चित्रकार, संगीतकार, नाटककार और शिक्षा के क्षेत्र में एक नई इबारत लिख दिया। उन्होंने दुनिया को दिखाया कि कला और साहित्य की कोई सीमा नहीं होती।सन 1913 में जब उनकी काव्य रचना गीतांजलि के लिए उन्हें साहित्य में नोबेल पुरस्कार मिला तो वह यह सम्मान पाने वाले पहले गैर यूरोपीय और पहले एशियाई व्यक्ति बने।उनकी कविताओं में ईश्वर के प्रति समर्पण और प्रकृति के प्रति प्रगाढ़ प्रेम झलकता है। इसलिए उन्होंने शांति निकेतन जैसे विश्वविद्यालय की स्थापना की जो शिक्षा का हर पहलू को स्पर्श करता है। टैगोर दुनिया के एकलौते ऐसे कवि हैं जिनकी रचनाएं दो अलग-अलग देश का राष्ट्रगान बनने। भारत का राष्ट्रगान जन- गण- मन तथा बांग्लादेश का राष्ट्रगान आमर सोनार बांग्ला इन्हीं की रचनाएं हैं। रविंद्र नाथ टैगोर के देशभक्ति और स्वाभिमान पर प्रकाश डालते हुए निदेशक ने कहा कि टैगोर का हृदय जितना कोमल था उनके स्वाभिमान उतना ही अडिग।1919 में हुए भीषण जालियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में उन्होंने अंग्रेजों द्वारा दी गई नाइटहुड 'सर' की उपाधि वापस लौटा दी थी। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि मानवता और देश प्रेम से बढ़कर कोई सम्मान नहीं है। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं के बीच पेंटिंग, भाषण एवं निबंध प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को मेडल एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षक वीरेंद्र शाह,खुर्शीद आलम, दिनेश कुमार,मुकेश भारती, निराशा शर्मा, नीलम कुमारी, सुनीता कुमारी, चंदा कुमारी शालिनी कुमारी पूजा प्रकाश,शिवानी कुमारी, संतोष प्रसाद व कृष्ण कुमार की भूमिका सराहनीय रही। मंच का संचालन नीरा शर्मा ने की जबकि धन्यवाद ज्ञापन कृष्ण कुमार द्वारा किया गया।
