नवादा की मस्जिद अहमद रज़ा में अकीदत के साथ हुआ खत्म तरावीह, दुआ और मिलाद में उमड़ी सैकड़ों लोगों की भीड़
गढ़वा से विकास कुमार की रिपोर्ट
गढ़वा प्रखंड अंतर्गत नवादा स्थित मस्जिद अहमद रज़ा में रमजान उल मुबारक के पवित्र महीने में 12वीं रमजान की मुबारक रात को तरावीह की नमाज का खत्म तरावीह बड़े ही अकीदत और धार्मिक माहौल के बीच संपन्न हुआ। इस अवसर पर क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोग मस्जिद में इकट्ठा हुए और अल्लाह की इबादत में शामिल हुए। पूरा माहौल कुरआन की तिलावत, दुआ और इबादत से आध्यात्मिक हो उठा।
इस दौरान तरावीह की नमाज की इमामत हाफिज इरफान साहब ने की, जो इस समय मुबारकपुर में दीनी तालीम (इल्म) हासिल कर रहे हैं। हाफिज इरफान साहब पाटन प्रखंड के सुथा गांव के निवासी हैं। उन्होंने पूरे रमजान के दौरान बेहद खूबसूरत आवाज और बेहतरीन अंदाज में कुरआन शरीफ की तिलावत करते हुए तरावीह की नमाज अदा कराई। उनकी मधुर आवाज और प्रभावशाली इमामत से नमाजी काफी प्रभावित हुए और पूरी श्रद्धा के साथ नमाज में शामिल रहे।
खत्म तरावीह के मौके पर गांव के लोग बड़ी संख्या में मस्जिद पहुंचे। लोगों ने शरबत और पानी लेकर भी मस्जिद में हाजिरी दी। इस संबंध में लोगों की आस्था है कि कुरआन शरीफ की तिलावत के दौरान पढ़ा गया पानी और शरबत अल्लाह की बरकत से मरीजों के लिए शिफा का काम करता है। इसलिए कई लोग अपने साथ पानी और शरबत लेकर आए ताकि उस पर दुआ पढ़ी जा सके।
कार्यक्रम के दौरान कुछ देर के लिए मिलाद शरीफ का भी आयोजन किया गया। इस मौके पर मदरसा दारुल उलूम फैजान सैय्यदना पाक के प्रिंसिपल मौलाना सफ़ीउलजमा मिस्बाही ने दुआ कराई और लोगों को संबोधित करते हुए महत्वपूर्ण तकरीर पेश की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कुरआन शरीफ सिर्फ पढ़ने की किताब नहीं है, बल्कि यह इंसानियत के लिए मार्गदर्शन का ग्रंथ है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि कुरआन को केवल पढ़ना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे समझना और उसके बताए हुए रास्ते पर अमल करना भी उतना ही जरूरी है।
मौलाना सफ़ीउलजमा मिस्बाही ने कहा कि जब इंसान कुरआन को समझकर उसके संदेश को अपने जीवन में उतारने की कोशिश करेगा, तभी वह सही मायनों में यह समझ पाएगा कि अल्लाह तआला हमसे क्या कहना चाहता है और हमें किस रास्ते पर चलने की हिदायत देता है। उन्होंने लोगों से अच्छे आचरण, आपसी भाईचारे और समाज में शांति बनाए रखने की भी अपील की।
इस धार्मिक कार्यक्रम में नवादा मस्जिद के मोअज्जिन उस्मान साहब, मस्जिद कमेटी के सदस्य हाजी इदरीस साहब, उम्मत रसूल साहब, हाजी मुस्लिम साहब, मोबिन कादरी, मजहर हुसैन, मकसूद कादरी, इकबाल अंसारी, इस्तेखार अंसारी, जाकिर हुसैन, चांद अंसारी, अंजुम अंसारी, इरफान (संतु), राजू अंसारी, अकबर अंसारी, इम्तियाज अंसारी, मेराज कादरी, महमूद अंसारी, कौसर अंसारी, बबलू, झंडू, मंजूर, टिंकू, शरीफ आलम, फैयाज, आदम, सफीक, सनवर, मुर्तुजा, रमजान, रसीद, रौशन, नुमान, मनान, अजहर, सुल्तान, अकबर, फैजान, महफूज, अरमान, शाहबाज, दाऊद, तनवीर, गुलाम, मोहम्मद रजा, इशरत, मोहसिन अंसारी, गुलाम गौश, एहतेशाम, मुन्तजिर, अफजल, असगर सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम शांतिपूर्ण और धार्मिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। स्थानीय लोगों ने इस अवसर को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक बताया।
इस संबंध में जानकारी मोहसिन अंसारी ने दी।
