स्थानीय नरगिर आश्रम गढ़देवी मोहल्ला मे चैत्र नवरात्र पर आयोजित नवाह पाठ सह रामकथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। जिनमें बड़ी संख्या महिला श्रद्धालुओ की थी।
आज राम विवाह पर आकर्षक झांकी निकाली गयी। गढ़ देवी मोड़ से रामजी की बारात रोड लाइट एवं बैंड बाजा के साथ निकली। आयोजक मण्डली के सदस्यों ने जय श्री राम के नारों के साध जमकर ठुमके लगाए और आतिश बाजी की। सीता जी की ओर से बारातियों का स्वागत विवाह गीत के साथ जोरदार हुआ। धनुष टूटने के साथ राम सीता का विवाह जीवन्त हो उठा। राजा जनक ने प्रतिज्ञा की थी कि जो शिव का धनुष उठाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। श्री राम ने न केवल धनुष उठाया, बल्कि प्रत्यंचा चढ़ाते समय उसे तोड़ दिया। राम-सीता विवाह के बाद, राजा जनक की छोटी पुत्री और सीता की बहन उर्मिला का विवाह लक्ष्मण के साथ हुआ।
इसी समय भरत का विवाह मांडवी से और शत्रुघ्न का विवाह श्रुतकीर्ति से हुआ यह मिथिला और अयोध्या के बीच एक बहुत बड़ा उत्सव था।
राम-सीता का विवाह प्रेम, त्याग और साझा जिम्मेदारी का आदर्श माना जाता है।
बालस्वामी जी एवं उनके मण्डली के गायकों ने कर्णप्रिय विवाहगीत और सोहर गाकर उपस्थित श्रोताओं को भाव विभोर कर खूब वाह वाही लूटी। बालस्वामी प्रपन्नाचार्य ने विवाह के पूर्व की घटनाओं का रोचक एवं मार्मिक वर्णन आज की कथा में किया। ऋषि विश्वामित्र ताड़का मारीच-सुबाहु जैसे राक्षसों द्वारा यज्ञ में विघ्न डालने के कारण, अपनी तपस्या की रक्षा के लिए राजा दशरथ से उनके पुत्र राम और लक्ष्मण को माँगा था। वे राम को वन ले जाने पर अड़े थे, क्योंकि केवल वही इन राक्षसों का संहार कर सकते थे। अपने कलेजे के टुकड़ों को दशरथ जी ने पहलेतो देने से इनकार किया परन्तु वशिष्ठ मुनि के कहने से बाद में तैयार हो गए।बालस्वामी ने कामनाओं और इच्छाओं को मानव के दुःख का प्रमुख कारण बताया। जिनकी इच्छाएं कम होती है उनके दुःख भी अपेक्षाकृत कम होते हैं। यदि व्यक्ति सच्चे मन से पूरे विश्वास के साथ ईश्वर से कुछ मांगे तो उसकी मन्नत वे अवश्य पूरी करते हैं। ईश्वर से दैन्य भाव से कुछ भी मांगना चाहिए। भक्तों के मन की व्यथा किसी संत द्वारा ईश्वर तक पहुंचाई जाती है तो वह कथा का रूप ले लेती है।
रामकथा समिति के अध्यक्ष चन्दन जायसवाल ने बताया कि कथा 26 मार्च तक होगी। अगले दिन नवमी को हवन के साथ प्रसाद वितरण होगा। उन्होंने ने सभी राम भक्तों से अपील की वे अधिक से अधिक संख्या मे आकर कथा को आत्मसात करें और पुण्य के भागी बने।
