रोजगार की तलाश में गया युवक, महाराष्ट्र से लौटा शव Bhawnathpur

रोजगार की तलाश में गया युवक, महाराष्ट्र से लौटा शव
भवनाथपुर प्रखंड क्षेत्र के मकरी पंचायत में पलायन की त्रासदी को एक बार फिर उजागर करती है। ढेकुलिया टोला निवासी विधवा सरिता कुंवार के पुत्र नवीन विश्वकर्मा उर्फ बंटी की मौत ने पूरे गांव को शोकाकुल कर दिया है। बताया जाता है कि नवीन अपने घर का बड़ा बेटा था और कुछ दिनों पहले ही रोजगार की तलाश में महाराष्ट्र गया था। वहां एक सप्ताह पूर्व उसका शव संदिग्ध अवस्था में एक कमरे से बरामद हुआ। इस दुखद समाचार ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। विधवा मां सरिता कुंवार ने भारी आर्थिक संकट के बावजूद जमीन गिरवी रखकर महाराष्ट्र से बेटे का शव मंगवाया। 
यह संघर्ष न केवल उनके व्यक्तिगत साहस को दर्शाता है, बल्कि उस सामाजिक-आर्थिक स्थिति को भी उजागर करता है जिसमें ग्रामीण परिवार मजबूर होकर पलायन करते हैं। गढ़वा जिला और भवनाथपुर क्षेत्र में यह कोई नई घटना नहीं है। रोजगार की कमी और सरकारी योजनाओं के कमजोर क्रियान्वयन के कारण यहां से लगातार मजदूर बाहर जा रहे हैं। मनरेगा जैसी योजनाएं, जो ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार देने के लिए बनाई गई थीं, आज प्रभावित हैं।
 परिणामस्वरूप हर महीने किसी न किसी परिवार को बाहर से अपने प्रियजन का शव लाना पड़ता है। यह स्थिति न केवल आर्थिक बोझ बढ़ाती है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी कमजोर करती है। नवीन की मौत पर गांव के मुखिया सरिता देवी, उनके पति धनंजय साह, राजेंद्र विश्वकर्मा और मुकेश विश्वकर्मा सहित कई लोग शोकाकुल परिवार के घर पहुंचे और उन्हें ढांढस बंधाया। लेकिन यह सांत्वना उस गहरी पीड़ा को कम नहीं कर सकती जो पलायन और बेरोजगारी की वजह से बार-बार सामने आ रही है। यह घटना सरकार और समाज दोनों के लिए चेतावनी है कि यदि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर नहीं बढ़ाए गए तो पलायन की यह त्रासदी और गहरी होती जाएगी। 
भवनाथपुर जैसे क्षेत्रों में स्थायी समाधान की आवश्यकता है ताकि मजदूरों को अपने गांव छोड़कर असुरक्षित परिस्थितियों में काम करने न जाना पड़े।

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