₹2,500 के मानदेय पर कब तक गुजारा? पंचायत सहायकों ने राज्यपाल को सौंपा मांग-पत्र, ₹20 हजार वेतन और स्थायीकरण की उठाई मांग
**10 वर्षों से अल्प मानदेय पर काम करने का दावा; 60 वर्ष तक सेवा सुरक्षा, 80% क्षैतिज आरक्षण और ₹10 लाख बीमा की मांग, आंदोलन की चेतावनी**
**डंडई से संवाददाता बिन्दु कुमार की रिपोर्ट**
झारखंड के पंचायत सहायकों ने मानदेय वृद्धि और सेवा स्थायीकरण की मांग को लेकर राज्यपाल के समक्ष अपनी आवाज बुलंद की है। गुरुवार को राज्य स्तरीय पंचायत सहायक संघ, झारखंड प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन में महामहिम राज्यपाल के नाम पांच सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा। संघ ने वर्तमान ₹2,500 मासिक प्रोत्साहन राशि के स्थान पर ₹20,000 न्यूनतम मासिक वेतन, सेवा स्थायीकरण और सरकारी कर्मी का दर्जा देने की मांग की।
संघ के प्रदेश सचिव बालदेव करमाली ने कहा कि पंचायत सहायक पिछले करीब 10 वर्षों से आवास, पेंशन, राशन, मनरेगा और डिजिटल पंचायत सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में योगदान दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाली राशि से परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो रहा है।
*पंचायत सहायकों की पांच सूत्रीय मांगें*
1. **वेतन वृद्धि:** ₹2,500 के स्थान पर न्यूनतम ₹20,000 मासिक वेतन निर्धारित किया जाए।
2. **सेवा स्थायीकरण:** स्थायी सेवा नियमावली बनाकर सरकारी कर्मी का दर्जा दिया जाए।
3. **सेवा सुरक्षा एवं आरक्षण:** 60 वर्ष तक सुरक्षित सेवा और सरकारी बहालियों में 80 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जाए।
4. **बीमा एवं सामाजिक सुरक्षा:** निःशुल्क इलाज, आकस्मिक मृत्यु पर ₹10 लाख की बीमा सहायता और पात्र आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति मिले।
5. **निगरानी एवं बकाया भुगतान:** मॉनिटरिंग आयोग का गठन कर लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाए। मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन की चेतावनी
संघ ने कहा कि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होने की स्थिति में आंदोलन तेज किया जाएगा। राज्यपाल सचिवालय ने मांग-पत्र स्वीकार किया है। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश सचिव बालदेव करमाली, प्रदेश उपाध्यक्ष अजय बास्के और प्रदेश कोषाध्यक्ष अकबर अंसारी सहित पांच सदस्य शामिल थे।
**अब पंचायत सहायकों की निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं। संघ को उम्मीद है कि उनकी मांगों पर विचार कर उचित निर्णय लिया जाएगा।**
