हनुमान भक्ति से मिला हौसला, 174 जिंदगियों के रक्षक बने कैप्टन स्मित News

हनुमान भक्ति से मिला हौसला, 174 जिंदगियों के रक्षक बने कैप्टन स्मित
अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और आस्था की वह गाथा, जिसे कला-साधक भी श्रद्धा से नमन करते हैं

          आकाश की ऊँचाइयों में उड़ते विमान के भीतर जब जीवन और मृत्यु के बीच कुछ ही क्षणों का अंतर रह जाए, तब मनुष्य की असली परीक्षा होती है। ऐसी ही भयावह परिस्थिति में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सूझबूझ का परिचय देते हुए 174 यात्रियों की जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वयं गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और संकट की घड़ी में वह निर्णय लिया, जिसने एक बड़ी त्रासदी को टालने में मदद की।

          दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में संकट उस समय गहरा गया, जब कॉकपिट में सह-पायलट ने कैप्टन स्मित पर हमला कर दिया और विमान तेजी से नीचे जाने लगा। गंभीर चोटों के बावजूद स्मित ने स्वयं को संभाला और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को हस्तक्षेप करने का अवसर मिला और विमान को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब के ताबुक हवाईअड्डे की ओर मोड़ा गया।

          इस पूरे घटनाक्रम की सबसे भावपूर्ण कड़ी तब सामने आई, जब अस्पताल में उपचाराधीन कैप्टन स्मित ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत की। उन्होंने बताया कि उस कठिन क्षण में वे हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे और उससे उन्हें साहस मिला। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, मोदी ने उनके साहस और जीवन बचाने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की तथा उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

        कैप्टन स्मित की यह बात भारतीय मन की उस आस्था को भी अभिव्यक्त करती है, जिसमें संकट के समय मनुष्य अपने आराध्य से शक्ति और संबल प्राप्त करता है। हनुमान भक्ति और कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा का यह संगम इस घटना को केवल साहस की कहानी नहीं रहने देता, बल्कि इसे मानवीय विश्वास और आत्मबल की प्रेरक गाथा बना देता है।

कला-साधकों की संवेदना से नमन

          भारतीय कला-साधकों के लिए ऐसी घटनाएँ केवल समाचार नहीं होतीं। कलाकार समाज की संवेदनाओं को शब्द, रंग, रेखा, स्वर, ताल और अभिनय में अभिव्यक्त करता है। जिस प्रकार कैप्टन स्मित ने संकट के बीच अपने कर्तव्य को सर्वोच्च माना, उसी प्रकार कला-साधक भी अपनी साधना के माध्यम से राष्ट्र की चेतना, संस्कृति और मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाते हैं।

         एक चित्रकार के कैनवास पर साहस का रंग उभर सकता है, कवि की लेखनी में वीरता का स्वर जन्म ले सकता है, संगीतकार के सुरों में आस्था गूंज सकती है और रंगमंच पर कैप्टन स्मित की यह घटना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन सकती है। यही कला की शक्ति है—वह किसी घटना को स्मृति से उठाकर संवेदना और संस्कार में बदल देती है।

        आज जब कैप्टन स्मित मच्छार अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं, तब देशभर की शुभकामनाएँ उनके साथ हैं। उनकी वीरता को नमन करते हुए भारतीय कला-साधकों की ओर से यही प्रार्थना है कि हनुमान जी की कृपा से वे शीघ्र पूर्णतः स्वस्थ हों और उनका साहस एवं यश निरंतर बढ़ता रहे।

          कैप्टन स्मित मच्छार की गाथा हमें यह विश्वास दिलाती है कि संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो, कर्तव्य के प्रति निष्ठा, मन का साहस और आस्था का संबल मिल जाए तो मनुष्य असाधारण परिस्थितियों में भी असाधारण कार्य कर सकता है।

          हनुमान भक्त कैप्टन स्मित मच्छार जी के अदम्य साहस, राष्ट्रनिष्ठा और मानवीय संवेदना को शत-शत नमन।

«“आस्था ने दिया आत्मबल, कर्तव्य ने दिया संकल्प और साहस ने बचाईं जिंदगियाँ।”»
नीरज श्रीधर ‘स्वर्गीय’
प्रांतीय कला धरोहर संयोजक
संस्कार भारती, झारखण्ड प्रांत

निदेशक
पं. हर्ष द्विवेदी कला मंच
नवादा, गढ़वा (झारखण्ड)

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