**कांडी (गढ़वा):** प्रखंड क्षेत्र के ग्राम बलियारी निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक स्वर्गीय संजय दुबे का दशगात्र, श्राद्धकर्म एवं ब्रह्मभोज रविवार को उनके पैतृक आवास पर अत्यंत श्रद्धा, सादगी और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
प्रशासनिक, सामाजिक, व्यापारिक एवं राजनीतिक जगत के गणमान्य व्यक्तियों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों व शुभचिंतकों ने उपस्थित होकर दिवंगत पुण्यात्मा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की तथा ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की।
**उच्च संस्कारों की छाया में चमकती अगली पीढ़ी**
जीवनपर्यंत शिक्षा की अलख जगाने वाले स्वर्गीय संजय दुबे के आदर्शों और संस्कारों का ही सुफल है कि उनके परिवार की नई पीढ़ी आज देश व समाज के सर्वोच्च पदों पर अपनी अमिट छाप छोड़ रही है। इस भावुक क्षण में उनकी नतिनी श्रीमती नम्रता चौबे (भा.प्र.से.), मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत बीजापुर (छत्तीसगढ़) तथा उनके दामाद श्री मुकुंद ठाकुर (भा.प्र.से.), मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत सुकमा (छत्तीसगढ़) ने विशेष रूप से उपस्थित होकर अपने पूज्य अभिभावक को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की।
स्वर्गीय दुबे के नाती श्री साकेत कुमार तिवारी (झा.प्र.से.), प्रशिक्षु क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी (पलामू) तथा उच्च शोध एवं शिक्षा जगत में सक्रिय डॉ. ज्योति चौबे ने भी उन्हें नमन किया। गढ़वा के प्रतिष्ठित समाजसेवी एवं प्रमुख व्यवसायी श्री विपिन कुमार चौबे (गुड्डू चौबे), भतीजे श्री आनंद प्रकाश दुबे सपरिवार, समस्त गोतिया-परिवार एवं आत्मीय जन इस पावन अनुष्ठान में सहभागी बने।
**सादगी के साथ सामाजिक सरोकार**
आयोजन की संपूर्ण व्यवस्था स्वर्गीय दुबे के सुपुत्र द्वय श्री अविनाश कुमार दुबे एवं श्री पंकज कुमार दुबे ने परिजनों के सहयोग से सुचारू रूप से संभाली। परिवार ने केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न रहकर स्वर्गीय दुबे की स्मृति को जनसेवा से जोड़ा। इस अवसर पर निर्धन, असहाय व वंचित परिवारों के बीच अन्न, वस्त्र एवं दैनिक उपयोगी सामग्रियों का वितरण कर सामाजिक समरसता की मिसाल पेश की गई।
**कठिनाइयों में भी धैर्य की प्रतिमूर्ति**
उपस्थित परिजनों एवं वक्ताओं ने उनके जीवनवृत्त को स्मरण करते हुए कहा कि स्वर्गीय संजय दुबे ने जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना सदैव धैर्य, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के साथ किया। एक समर्पित शिक्षक एवं अभिभावक के रूप में उन्होंने न केवल अपने परिवार को सशक्त दिशा दी, बल्कि समाज में शुचिता और नैतिक मूल्यों का बीजारोपण भी किया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजित ब्रह्मभोज में सैकड़ों ग्रामीणों व क्षेत्रवासियों ने प्रसाद ग्रहण किया। आगंतुकों ने एक स्वर में कहा कि स्वर्गीय दुबे ने विरासत में केवल यश और प्रतिष्ठा ही नहीं छोड़ी, बल्कि संस्कारवान पीढ़ी और आत्मीय संबंधों की जो अमूल्य पूंजी दी है, वह पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है।
