बेटियों की शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता अभियान, बाल विवाह व दहेज प्रथा के खिलाफ ग्रामीणों को किया जागरूक Garhwa

बेटियों की शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता अभियान, बाल विवाह व दहेज प्रथा के खिलाफ ग्रामीणों को किया जागरूक

रमना (गढ़वा)। जानकी सामूहिक विवाह फाउंडेशन की ओर से मंगलवार को रमना प्रखंड के पिपरी गांव में जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के लोगों, विशेषकर बेटियों और महिलाओं को स्वास्थ्य एवं शिक्षा के प्रति जागरूक करना तथा समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ लोगों को एकजुट करना था। इस दौरान फाउंडेशन के सदस्यों ने ग्रामीणों से बेटियों को बेहतर शिक्षा दिलाने और उनके स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की अपील की।

जागरूकता अभियान के दौरान लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। फाउंडेशन के सदस्यों ने कहा कि कम उम्र में विवाह होने से बेटियों की शिक्षा प्रभावित होती है और उनके स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसलिए बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

अभियान में भ्रूण हत्या जैसे गंभीर सामाजिक अपराध के खिलाफ भी लोगों को जागरूक किया गया। वक्ताओं ने कहा कि बेटा और बेटी में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। बेटियां भी परिवार, समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में बेटियों को जन्म से ही समान अधिकार, शिक्षा और सम्मान मिलना जरूरी है।

इस दौरान दहेज प्रथा के खिलाफ भी ग्रामीणों को जागरूक किया गया। लोगों से अपील की गई कि विवाह को लेन-देन का माध्यम न बनाएं और दहेज जैसी कुप्रथा को समाप्त करने के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करें। फाउंडेशन की ओर से कहा गया कि दहेज के कारण कई परिवार आर्थिक और सामाजिक दबाव का सामना करते हैं। इस कुप्रथा को खत्म करने के लिए बिना दहेज के विवाह को बढ़ावा देना आवश्यक है।

अभियान के दौरान सामूहिक विवाह को सामाजिक और आर्थिक रूप से उपयोगी पहल बताते हुए इसे प्रोत्साहित करने की अपील की गई। बताया गया कि सामूहिक विवाह के माध्यम से विवाह में होने वाले अनावश्यक खर्च को कम किया जा सकता है तथा समाज के जरूरतमंद परिवारों को सहयोग मिल सकता है। साथ ही इससे दहेज जैसी कुरीतियों पर भी प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।

फाउंडेशन के सदस्यों ने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि बेटियों की शिक्षा को बीच में न रोकें और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने का अवसर दें। स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए महिलाओं और बेटियों का शिक्षित एवं स्वस्थ होना बेहद जरूरी है। इसके लिए परिवार और समाज दोनों को मिलकर सकारात्मक भूमिका निभानी होगी।


अभियान के दौरान ग्रामीणों ने भी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने और बेटियों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में रमेश कुमार, सोनी देवी, उषा कुमारी, शशि देवी, दुर्गावती देवी, रुना देवी, रुदा देवी, छटनी देवी और ललिता देवी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। फाउंडेशन की ओर से बताया गया कि समाज में जागरूकता लाने के लिए इस तरह के अभियान आगे भी जारी रखे जाएंगे।

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