विद्यार्थी हितों के बजाय प्रायोजित ड्रामेबाज़ी और सस्ती लोकप्रियता की राजनीति कर रहा है AISA : प्रिन्स
गढ़वा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के विभाग संयोजक प्रिन्स सिंह ने कहा कि विद्यार्थी हितों के वास्तविक मुद्दों पर संघर्ष करने के बजाय सस्ती लोकप्रियता हासिल करना, मीडिया की सुर्खियां बटोरना और राजनीतिक लाभ के लिए प्रायोजित ड्रामेबाज़ी करना AISA की पुरानी कार्यशैली रही है। उन्होंने कहा कि रांची में घटित हालिया घटना भी उसी कड़ी का हिस्सा प्रतीत होती है, जहाँ तथ्यों से अधिक प्रचार और राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने को प्राथमिकता दी जा रही है। झारखंड के लाखों छात्र आज JPSC एवं JSSC जैसी भर्ती परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं, पेपर लीक, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी तथा युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर प्रश्नों को लेकर चिंतित हैं। ऐसे समय में छात्र संगठनों की जिम्मेदारी इन मुद्दों को मजबूती से उठाने और विद्यार्थियों की आवाज़ बनने की होनी चाहिए, लेकिन कुछ संगठन छात्रहित से जुड़े मूल प्रश्नों से ध्यान भटकाकर केवल राजनीतिक एजेंडा चलाने में लगे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि अभाविप का स्पष्ट मत है कि यदि किसी ने भी किसी व्यक्ति पर स्याही फेंकने या इस प्रकार की कोई भी अनुचित हरकत की है, तो वह पूरी तरह निंदनीय है। अभाविप न तो ऐसी किसी गतिविधि का समर्थन करता है और न ही उसकी कार्यशैली कभी इस प्रकार की रही है। विद्यार्थी परिषद् हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों, शांतिपूर्ण आंदोलन, वैचारिक संवाद और संवैधानिक तरीकों से संघर्ष में विश्वास रखती है।
किसी भी घटना को बिना तथ्यों के आधार पर राजनीतिक रंग देना, झूठे आरोप लगाना तथा स्वयं को पीड़ित बताकर सहानुभूति बटोरने का प्रयास लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। विद्यार्थी आंदोलनों को राजनीतिक नौटंकी का माध्यम बनाकर भ्रम फैलाना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे छात्रों के वास्तविक मुद्दे पीछे छूट जाते हैं और केवल प्रचार की राजनीति को बढ़ावा मिलता है।
कहा कि अभाविप वर्षों से देशभर में विद्यार्थियों के शैक्षणिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय हितों के लिए संघर्ष करती आई है। संगठन का उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है।
विद्यार्थियों के हितों से जुड़े प्रश्नों का समाधान लोकतांत्रिक, जिम्मेदार एवं रचनात्मक संघर्ष से ही संभव है, न कि प्रायोजित घटनाओं, झूठे आरोपों और सस्ते नैरेटिव गढ़कर। उन्होंने सभी छात्र संगठनों से छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए सकारात्मक, जिम्मेदार और तथ्यपरक राजनीति करने की अपील की है।
