आपदा प्रभावित परिवारों की पीड़ा से रूबरू हुआ प्रशासन, सहायता का मिला भरोसा Garhwa

गढ़वा से विकास कुमार की रिपोर्ट 


कॉफी विद एसडीएम’ : आपदा प्रभावित परिवारों की पीड़ा से रूबरू हुआ प्रशासन, सहायता का मिला भरोसा
सबसे ज्यादा मामले सड़क दुर्घटना के, मरने वाले लोगों में ज्यादातर 18 से 25 वर्ष के बीच

ज्यादातर परिजनों ने अब तक मिली प्रशासनिक राहत और मुआवजा राशि पर संतोष जताया

आपदा प्रभावित परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ा है प्रशासन :  एसडीएम
गढ़वा। सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार के नियमित साप्ताहिक संवाद कार्यक्रम ‘कॉफी विद एसडीएम’ के तहत बुधवार को अनुमंडल सभा कक्ष में एक अत्यंत संवेदनशील बैठक आयोजित की गई, जिसमें अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न प्रखंडों से आए आपदा प्रभावित परिवारों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान लोगों ने अपनों के खोने के दर्दनाक अनुभव साझा किए साथ ही मुआवजा एवं अन्य सहायता से संबंधित मुद्दों को रखा, जिन्हें एसडीएम ने बड़ी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना तथा यथासंभव पहल का भरोसा दिलाया।
कार्यक्रम में शामिल अधिकांश लोग ऐसे थे, जिन्होंने अपने परिजनों को सड़क दुर्घटना, वज्रपात, सर्पदंश, डूबने, आगजनी या अन्य आपदाओं में खो दिया था। वहीं कुछ लोगों ने अपने पशुओं की मृत्यु, घर में आग लगने से संपत्ति के नुकसान तथा अन्य आर्थिक-सामाजिक समस्याओं को भी सामने रखा।
मेराल के डॉ. लालमोहन ने अपने इकलौते पुत्र की वज्रपात से हुई मृत्यु का जिक्र करते हुए अब तक प्राप्त प्रशासनिक सहायता पर संतोष व्यक्त किया। वहीं मझिआंव के उदय राम ने बताया कि उनका पुत्र 10वीं कक्षा में पढ़ता था और किसी अन्य की जान बचाने के दौरान नदी में डूब गया। उन्होंने सरकार से मिली सहायता राशि का उल्लेख करते हुए वर्तमान समस्याएं भी रखीं।
गढ़वा हंसकेर निवासी विजय कुमार तिवारी ने अपने जवान बेटे की सड़क दुर्घटना में मृत्यु का मामला उठाया, जिस पर उन्हें इस प्रकरण को ट्रिब्यूनल तक ले जाने की सलाह दी गई। करुआ कला के रामानंद उपाध्याय ने बताया कि उनके पुत्र की दुर्घटना में मृत्यु के बाद उन्हें ‘हिट एंड रन’ प्रावधान के तहत सहायता मिल चुकी है।
वीरबंधा की रीना देवी ने अपने राजमिस्त्री पति के ऊपर कार्य के दौरान ही दीवार गिरने से हुई मृत्यु के बाद छोटे बच्चों के पालन-पोषण की समस्या रखी, जिस पर उनके बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ने का निर्देश दिया गया। इसी प्रकार कई अन्य पीड़ित परिवारों से प्रवेश पांडे, विष्णु देव प्रजापति, विनोद कुमार, रामकली, जुगलराज, वशिष्ठ विश्वकर्मा, शत्रुघ्न उरांव, अली हुसैन अंसारी, त्रिभुवन राम, लुकमान अंसारी, राजेंद्र यादव, विषम्भर कुमार, पति प्रजापति, इस्लाम अंसारी, प्रदीप राम एवं मुकेश कुमार यादव ने भी अपनी समस्याएं रखीं, जिन पर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।
डुमरसोता निवासी विनोद कुमार ने बताया कि उनके साले जोगेंद्र चौधरी का आपदा में आकस्मिक निधन हो गया था। उन्हें सरकारी सहायता मिल चुकी है, परंतु बच्चों के पालन-पोषण के लिए अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता है। इस पर उन्हें भी स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ने का निर्देश दिया गया। लखेया , मेराल निवासी रामकली ने बताया कि उनके पति शंभू बैठा का वज्रपात से निधन हो गया था तथा उन्हें पेयजल एवं अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिस पर संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया।
रजहारा निवासी जुगलराज ने बताया कि उनकी पत्नी एवं तीन पशुओं की मृत्यु वज्रपात से हो गई थी। पत्नी के मुआवजे की राशि प्राप्त हो चुकी है, लेकिन तीनों बकरियों के मुआवजे का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। इस पर संबंधित पदाधिकारी को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। वशिष्ठ विश्वकर्मा के 20 वर्षीय पुत्र गौतम कुमार की मृत्यु सड़क दुर्घटना में हुई थी, वहीं शत्रुघ्न उरांव के 22 वर्षीय भतीजा अरविंद उरांव की मृत्यु अज्ञात वाहन की टक्कर से हुई थी। इनकी समस्याओं को भी विस्तार से सुना गया।
मेराल के अली हुसैन अंसारी ने बताया कि उनके 18 वर्षीय नाती की मृत्यु सड़क दुर्घटना में हो गई थी। इसी प्रकार त्रिभुवन राम ने भी अपने 19 वर्षीय पुत्र को सड़क दुर्घटना में खो दिया। तसरार निवासी लुकमान अंसारी ने बताया कि अतिवृष्टि के कारण उनका घर गिर गया, लेकिन उन्हें अभी तक कोई सहायता नहीं मिली है। इस पर संबंधित अंचलाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया गया।
राजेंद्र यादव ने बताया कि वज्रपात से उनके पशुओं की मृत्यु हो गई थी, जिसके लिए उन्हें सहायता प्राप्त हो चुकी है, किंतु शेष पशुओं को सियार एवं अन्य जंगली जानवरों से खतरा बना रहता है। मोरबे निवासी विषम्भर कुमार ने बताया कि छठ पूजा के दौरान उनके दो बच्चों की डूबने से मृत्यु हो गई थी। उन्होंने अपनी इस पीड़ा के साथ-साथ आर्थिक स्थिति एवं आवास की समस्या भी रखी, जिस पर संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।

बाना निवासी पति प्रजापति ने बताया कि उनके जवान पुत्र की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई, जिसके छोटे-छोटे बच्चे हैं। उन्होंने उनके पालन-पोषण हेतु सहायता की मांग की, जिस पर जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी को निर्देशित किया गया। गुरदी के इस्लाम अंसारी ने बताया कि आगजनी में उनका 200 बोझा गेहूं एवं चार बकरियां जलकर नष्ट हो गईं, लेकिन उन्हें अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। इस पर उनसे लिखित आवेदन देने को कहा गया।

गेरुआ निवासी प्रदीप राम ने बताया कि उनके 19 वर्षीय पुत्र की मृत्यु सड़क दुर्घटना में हो गई थी, लेकिन अब तक प्रकरण में प्रगति नहीं हुई है। इस पर थाना प्रभारी मेराल को तत्काल रिपोर्ट समर्पित करने का निर्देश दिया गया। कांडी निवासी मुकेश कुमार यादव ने बताया कि उनके ससुर की मृत्यु वज्रपात से हो गई थी तथा उनके आश्रित 8 वर्षीय बच्चे की पढ़ाई में कठिनाई हो रही है, जिस पर आवश्यक सहयोग का निर्देश दिया गया।

सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले ज्यादातर हैं युवा
बैठक के दौरान यह भी सामने आया कि सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों में अधिकांश युवा (18 से 25 वर्ष आयु वर्ग) ही शामिल हैं। इस पर एसडीएम ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों को बाइक देने से पहले उन्हें यातायात नियमों के प्रति जागरूक करें, हेलमेट का अनिवार्य उपयोग सुनिश्चित कराएं तथा नशा और लापरवाही से बचने के लिए प्रेरित करें।

एसडीएम ने सभी उपस्थित लोगों को अपना संपर्क नंबर उपलब्ध कराते हुए कहा कि प्रशासन हर संभव सहायता के लिए उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि जनहानि की भरपाई संभव नहीं है, लेकिन पीड़ित परिवारों के दुख को कम करने के लिए प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य करेगा।

कार्यक्रम में आपदा राहत से जुड़े जिला स्तरीय पदाधिकारी, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी कार्यालय के कर्मी तथा अनुमंडल कार्यालय के संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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