कला सिखाती है धैर्य, अभिव्यक्ति और भविष्य की नई दिशाएँ
कला केवल एक प्रतिभा नहीं, बल्कि धैर्य, अभ्यास और निरंतर मेहनत से विकसित होने वाली क्षमता है। अक्सर यह माना जाता है कि कलाकार पैदा होते हैं, बनाए नहीं जाते, लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। नियमित अभ्यास और समर्पण के साथ कोई भी व्यक्ति एक अच्छा कलाकार बन सकता है। कला न सिर्फ धैर्य का महत्व बताती है, बल्कि व्यक्ति को धैर्यवान भी बनाती है।
कई बार लोग अपनी भावनाएँ शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते, लेकिन वही बातें वे अपनी कला के माध्यम से बहुत प्रभावशाली ढंग से दिखा और समझा सकते हैं। चित्रकला, मूर्तिकला, रेखांकन, डिजाइनिंग जैसे विभिन्न कला रूप व्यक्ति को अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम प्रदान करते हैं।
कला के क्षेत्र में करियर की भी अपार संभावनाएँ हैं।
पेंटिंग से लेकर स्कल्प्टिंग तक, ग्राफिक डिजाइनिंग से लेकर इलस्ट्रेशन तक अनेक विकल्प उपलब्ध हैं। आज के समय में ग्राफिक डिजाइनर एक अच्छी आय वाला पेशा बन चुका है। विज्ञापन जगत में हर पोस्टर, हर लोगो, हर ब्रांड पहचान के पीछे किसी कलाकार की रचनात्मक सोच काम करती है। कला प्रेमी लोग आर्ट गैलरी, डिजाइन स्टूडियो और क्रिएटिव एजेंसियों में भी अपना भविष्य बना सकते हैं।
यदि किसी विद्यार्थी की रुचि कला के साथ इतिहास में भी है, तो वह पुरातत्व (आर्कियोलॉजी) के क्षेत्र में भी आगे बढ़ सकता है। यह क्षेत्र भी रचनात्मकता और अध्ययन का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है।
कई लोगों के लिए कला मानसिक शांति का माध्यम भी है। रंगों और आकृतियों के साथ काम करते हुए उन्हें सुकून मिलता है और तनाव कम होता है।
गढ़वा जैसे क्षेत्रों में भी अनेक प्रतिभाशाली भविष्य के कलाकार मौजूद हैं। जरूरत है तो केवल सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन की। उचित दिशा मिले तो ये युवा कलाकार उत्कृष्ट कार्य कर सकते हैं और क्षेत्र का नाम रोशन कर सकते हैं।
विद्यार्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर कला कृति अपने आप में अनोखी होती है। यदि बनाई जा रही रचना बिल्कुल वैसी नहीं बन पा रही जैसी सोची थी, तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है। लगातार अभ्यास ही सफलता की कुंजी है। कला का मूल मंत्र है — धैर्य, अभ्यास और आत्मविश्वास।
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रिया राशि
चित्रकला कला साधिका
पंडित हर्ष द्विवेदी कला मंच
नवादा, गढ़वा (झारखण्ड)
