वर्षों पूर्व लगाया गया सरकारी चापाकल आज खतरे में है। Garhwa

साकेत मिश्रा की रिर्पोट 
कांडी(गढ़वा) : प्रखण्ड क्षेत्र अंतर्गत खुटहेरिया पंचायत के कुशहा गांव के रकसही टोला में वर्षों पूर्व लगाया गया सरकारी चापाकल आज खतरे में है।
 स्थानीय ग्रामीणों ने सोमवार को पीने के लिए पानी की समस्या को लेकर उक्त चापाकल के पास गोलबंद हुए। उपस्थित ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि लमारी कला गांव निवासी मुरलीधर सिंह ने उक्त टोले में अपने नवनिर्मित पक्का आवास के समीप सड़क किनारे लगे सरकारी चापाकल को बंद कर उसमें समर्सिबल डालकर अपना निजी कार्य व सिंचाई के लिए उपयोग करते हैं। जब ग्रामीणों ने विरोध जताया तो उनके द्वारा कहा गया कि इस चापाकल पर किसी भी ग्रामीणों को पानी नहीं पीने देंगे, जहां जाना है जाओ। ग्रामीणों ने इस सम्बंध में बीते 18 नवम्बर को प्रखण्ड विकास पदाधिकारी व थाना प्रभारी को लिखित आवेदन देकर शिकायत की गई थी। 
साथ ही जांच कर उचित कार्यवाई करने की मांग की गई थी, किंतु अब तक भी ग्रामीणों की शिकायत पर कोई सुनवाई व कार्यवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने बताया कि उक्त चापाकल से लगभग दर्जनों घर के परिवार लाभान्वित हो रहे थे। अब तो कई घर के लोग दूर-दूर जाकर स्नान किया करते हैं और घर में उपयोग करने के लिए पानी लाया करते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि मुरलीधर सिंह ने उक्त सरकारी चापाकल में न केवल समर्सिबल डाले हैं, बल्कि उक्त चापाकल से पाइप निकालकर काटकर सड़क किनारे रेलिंग भी कर दिए हैं। साथ ही उनके द्वारा चापाकल के चारों ओर मिट्टी डाल दिए हैं, चापाकल केवल डेढ़ फीट से कम ही दिखाई दे रहा है। हालांकि पंचायत मुखिया अनिता देवी के द्वारा एक बार मिट्टी निकलवाकर साफ भी करवाया गया था, किंतु कुछ ही दिनों बाद पुनः मिट्टी भर दिया गया। ग्रामीणों ने कहा कि सरकारी चापाकल इसलिए लगवाया गया था कि ग्रामीण व राहगीर उक्त चापाकल पर पानी पी सकें, किंतु उसे निजीकरण कर लिया गया है, जिससे ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों की पीड़ा सुनने को कोई तैयार नहीं है। ग्रामीण आखिर जाएं तो कहां, उनके सामने यह एक बड़ी समस्या आन पड़ी है।
 मौके पर उपस्थित प्रसाद यादव, बुधन यादव, भोला रजवार, करमु यादव, संतोष यादव, शम्भू यादव, नथन यादव, श्रद्धा देवी, कलावती कुवँर सहित दर्जनों ग्रामीणों ने मीडिया के माध्यम से प्रखण्ड विकास पदाधिकारी व थाना प्रभारी से पुनः मांग की है कि उक्त चापाकल को निजीकरण से आजाद कराते हुए पानी की समस्या से निजात दिलाएं। इस संबंध में मुरलीधर सिंह से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जिस समय चापाकल लगाया गया था, उस वक्त मैं शिक्षक के रूप में कार्यरत था।उक्त टोले के लोग अपने स्वार्थ में मेरी पैतृक सम्पत्ति की निजी भूमि में चापाकल लगवा दिए। जब मैं सेवानिवृत हुआ तो अपने जानकारी हुई की चापाकल के बहाने मेरी जमीन का दुरुपयोग हो रहा है। इस सम्बंध में मैंने विभागीय कई अधिकारियों को सूचना दी, किंतु एक नहीं सुनी गई, यह जांच का विषय है।अपनी निजी स्वार्थ को लेकर लोग मुझ पर आरोप लगा रहे हैं। वहीं इस सम्बंध में कांडी थाना प्रभारी अशफाक आलम से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मैं छुट्टी में हूँ। यदि थाना में आवेदन पड़ा है तो जांच के बाद कार्यवाई की जाएगी। जबकि प्रखण्ड विकास पदाधिकारी राकेश सहाय ने कहा कि मुझे जानकारी मिली है, समरसेबल तुरंत हटाया जाएगा, ग्रामीणों को कोई दिक्कत नहीं होगी।

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