अंचल के 13 वर्ष बीत जाने के बाद भी सरकार और प्रशान के उपेक्षा से पंगु बना हुआ है अंचल रामलाला Kandi

साकेत मिश्रा की रिर्पोट 
कांडी (गढ़वा): कांडी प्रखंड को अंचल का दर्जा मिले लगभग 13 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन की उपेक्षा के कारण आज यह अंचल पूरी तरह से पंगु बना हुआ है। आलम यह है कि 16 पंचायतों और लगभग एक लाख की आबादी वाले इस विशाल क्षेत्र का कार्यभार मात्र एक कार्यालय ऑपरेटर और एक हल्का कर्मचारी के भरोसे चल रहा है। उक्त बातें भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रामलाला दुबे ने प्रेस को जारी एक बयान में कहीं।
 श्री दुबे ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अंचल में सुचारू रूप से किसी स्वतंत्र अंचल पदाधिकारी की नियुक्ति आज तक नहीं हो सकी है। विशेष परिस्थितियों में कांडी अंचल का कार्य मंझिआंव अंचल के कर्मियों के भरोसे संचालित किया जा रहा है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा नेता ने बताया कि कर्मचारियों की घोर कमी के कारण क्षेत्र के सैकड़ों छात्र-छात्राओं का आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र समय पर नहीं बन पा रहा है। इसके अभाव में कई मेधावी छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भरने और नामांकन से वंचित रह जा रहे हैं, जो उनके भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। वहीं दूसरी ओर, किसानों को जमीन के ऑनलाइन मोटेशन (दाखिल-खारिज) और मापी जैसे कार्यों के लिए महीनों कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। रामलाला दुबे ने गढ़वा उपायुक्त से आग्रह किया है कि कांडी अंचल की जनता की इन बुनियादी और गंभीर समस्याओं को देखते हुए तत्काल प्रभाव से यहाँ स्वतंत्र अंचल पदाधिकारी, हल्कावार कर्मचारी और आवश्यक कार्यालय ऑपरेटरों की पदस्थापना की जाए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि जल्द ही अंचल की व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो जनता के हित में आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया जाएगा।

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